शासकीय जमीन विवाद में राजू यादव को कोर्ट से बड़ी राहत

अपर सत्र न्यायालय ने दी अग्रिम जमानत, एफआईआर में देरी को माना अहम

घरघोड़ा/धरमजयगढ़। शासकीय भूमि के नामांतरण और उसके कथित तौर पर निजी नाम पर दर्ज होने के बाद क्रय-विक्रय से जुड़े मामले में आरोपी राजू कुमार यादव को अपर सत्र न्यायालय घरघोड़ा से बड़ी राहत मिली है। अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक शर्मा की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों, उपलब्ध राजस्व अभिलेखों और मामले की परिस्थितियों पर विचार करने के बाद राजू कुमार यादव की प्रथम अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली। अदालत के आदेश के बाद अब इस मामले में आरोपी की गिरफ्तारी पर अग्रिम राहत मिल गई है।
मामला धरमजयगढ़ थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां ग्राम अमलीटीकरा स्थित लगभग 1.312 हेक्टेयर भूमि के नामांतरण और बाद में उसके विक्रय को लेकर विवाद सामने आया था। पुलिस द्वारा भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) एवं 3(5) के तहत अपराध दर्ज किया गया था। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि संबंधित भूमि शासकीय प्रकृति की थी और उसे गलत तरीके से निजी व्यक्ति के नाम दर्ज कराकर बाद में 17 जनवरी 2025 को राजू यादव के पक्ष में विक्रय किया गया।

बचाव पक्ष ने पुराने राजस्व अभिलेखों को बनाया आधार

अग्रिम जमानत की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता सुशील शुक्ला ने अदालत के समक्ष पुराने राजस्व दस्तावेजों को महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया। बचाव पक्ष ने वर्ष 1930 की मिसल तथा 1954-55 के अधिकार अभिलेख सहित अन्य राजस्व रिकॉर्ड का हवाला देते हुए तर्क दिया कि संबंधित भूमि लंबे समय से निजी खातेदारों के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज रही है।

बचाव पक्ष का कहना था कि यदि भूमि वास्तव में शासकीय थी तो दशकों पुराने राजस्व अभिलेखों में उसका निजी खातेदारों के नाम दर्ज होना अपने आप में महत्वपूर्ण तथ्य है। इसी आधार पर यह भी दलील दी गई कि राजू यादव ने किसी शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा करने या उसे फर्जी तरीके से हासिल करने की नीयत से खरीद नहीं की, बल्कि उपलब्ध राजस्व अभिलेखों और संबंधित प्रक्रिया के आधार पर भूमि का क्रय किया।

एफआईआर दर्ज होने में देरी को लेकर उठाया सवाल

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से एफआईआर दर्ज होने की अवधि को लेकर भी दलील रखी गई। बचाव पक्ष ने अदालत के समक्ष कहा कि संबंधित भूमि का बैनामा 17 जनवरी 2025 को हुआ था, जबकि इस संबंध में दर्ज एफआईआर की तारीख 24 अगस्त 2026 है। बचाव पक्ष ने इस अंतराल को मामले की परिस्थितियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताते हुए अदालत का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया।
हालांकि, एफआईआर दर्ज होने में देरी के कारणों को लेकर अंतिम निष्कर्ष इस रिपोर्ट में नहीं दिया जा रहा है। यह तथ्य कि एफआईआर 24 अगस्त 2026 को दर्ज हुई, मामले के अभिलेखों का हिस्सा है, जबकि देरी के कारण और उसके कानूनी प्रभाव का निर्धारण जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होना है।
बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि उपलब्ध पुराने राजस्व अभिलेखों में संबंधित भूमि के निजी खातेदारों के नाम दर्ज होने के उल्लेख मिलते हैं। इसी आधार पर बचाव पक्ष ने आरोपी की ओर से किसी आपराधिक मंशा से भूमि खरीदने के आरोप से इनकार किया।

राजू बोले— आरोप बेबुनियाद, कानून पर पूरा भरोसा

अग्रिम जमानत मिलने के बाद राजू कुमार यादव ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया। उनका कहना है कि उन्होंने संबंधित भूमि का क्रय किसी गलत उद्देश्य से नहीं किया, बल्कि उपलब्ध राजस्व अभिलेखों और वैधानिक प्रक्रिया के आधार पर ही जमीन खरीदी थी।
राजू यादव ने कहा कि उनके विरुद्ध लगाए गए आरोपों से उन्हें गहरा आश्चर्य है, क्योंकि जिस भूमि को लेकर विवाद खड़ा किया गया है, उसके पुराने राजस्व रिकॉर्ड में भी निजी खातेदारों के नाम दर्ज होने की स्थिति सामने आती है। उनका कहना है कि उन्होंने जमीन खरीदने से पहले उपलब्ध दस्तावेजों और संबंधित प्रक्रिया का पालन किया था तथा उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि भविष्य में उक्त भूमि की प्रकृति को लेकर इस प्रकार का आपराधिक विवाद खड़ा होगा।
उन्होंने कहा कि “मेरे ऊपर लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं। मैंने पूरी वैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए भूमि खरीदी है। पुराने राजस्व अभिलेखों में भी भूमि की स्थिति स्पष्ट रूप से दर्ज है। मुझे न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है और मुझे विश्वास है कि जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया में वास्तविक तथ्य सामने आएंगे। सत्य को परेशान किया जा सकता है, लेकिन पराजित नहीं किया जा सकता।”

अब आगे की स्थिति पर टिकी निगाहें

अदालत से अग्रिम जमानत मिलने के बाद मामले की जांच की दिशा महत्वपूर्ण हो गई है। अब राजस्व अभिलेखों में भूमि की वास्तविक प्रकृति, पुराने खातों में दर्ज स्थिति, नामांतरण की प्रक्रिया, विक्रय के समय उपलब्ध दस्तावेज और संबंधित अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई जैसे पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण होगी।
एक ओर अभियोजन पक्ष का आरोप है कि शासकीय भूमि को गलत तरीके से निजी नाम पर दर्ज कराकर उसका विक्रय किया गया, वहीं बचाव पक्ष पुराने राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर भूमि को लंबे समय से निजी खातेदारों के नाम दर्ज होने का दावा कर रहा है। ऐसे में इस पूरे विवाद का वास्तविक निष्कर्ष मूल राजस्व अभिलेखों, नामांतरण की वैधता और भूमि की वास्तविक शासकीय अथवा निजी प्रकृति की जांच से ही स्पष्ट होगा।
फिलहाल अपर सत्र न्यायालय के आदेश से राजू कुमार यादव को गिरफ्तारी से राहत मिल गई है और अब सभी की नजरें आगे होने वाली जांच तथा न्यायिक कार्यवाही पर टिकी हैं।

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